एक तानाशाह के बचपन का फ़ोटो
एक तानाशाह के बचपन का फ़ोटो
एक तानाशाह के बचपन का फ़ोटो मैंने गौर से देखा।
एक छोटा-सा
बच्चा—
दो या तीन साल
का रहा होगा।
मुस्कान उसके
होंठों पर ठहरी हुई थी।
उसके सफ़ेद, मोतियों जैसे दाँत
चेहरे की
सुंदरता में उजास भर रहे थे।
आँखें निश्छल
और चमकीली थीं—
मानो कोई गहरी
झील
शांत होकर मुझे
देख रही हो।
घुँघराले बाल
मासूमियत की
ख़ामोश गवाही दे रहे थे।
दोनों हाथ हवा में
अठखेलियाँ कर रहे थे,
और नन्हे पैर
ज़मीन से भरोसा जोड़े खड़े थे—
बालपन की महक बिखेरते हुए।
ऐसा लगता था—
जैसे उसकी माँ
ठीक उसके सामने
खड़ी हो।।
जिस निडर-सी
मुस्कान से
वह निहार रहा
था सामने,
उसकी सच्चाई का
सबसे उजला
प्रमाण थी वह।
और कैमरा-मैन,
जिसने बेख़ौफ़
होकर
यह पल क़ैद कर
लिया,
दुनिया के लिए
छोड़ गया
एक यादगार—
एक तानाशाह के
बचपन का फ़ोटो मैंने गौर से देखा।
(आप क्या सोचते हैं—इंसान जन्म से ऐसा होता है, या हालात उसे वैसा बना देते हैं?)
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